
भारत सरकार ने Union Budget 2026-27 में किसानों के लिए सौर ऊर्जा क्रांति को और मजबूत करने के लिए PM-KUSUM (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evam Utthaan Mahabhiyan) योजना का अगला चरण PM-KUSUM 2.0 घोषित किया है। इस नए चरण में योजना का लक्ष्य न सिर्फ सोलर पंप और ग्रिड-कनेक्टेड सोलर सिस्टम को बढ़ावा देना है बल्कि किसानों को Urjadatas (ऊर्जा उत्पादक) बनाने, ग्रामीण ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को डीज़ल-निर्भरता से आज़ाद करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं।
नीचे हम PM-KUSUM 2.0 के सभी प्रमुख अपडेट्स, फायदे, रणनीति और विशेषज्ञ दृष्टिकोण को आसान और समझने योग्य हिंदी में पॉइंट-बाय-पॉइंट बता रहे हैं।
🌞 1. PM-KUSUM 2.0 क्या है?
✔ PM-KUSUM भारत सरकार की एक flagship योजना है जो किसानों को साफ़, किफायती और आत्म-निर्भर ऊर्जा (Solar Energy) प्रदान करती है।
✔ इसका मक़सद है:
- कृषि क्षेत्र में बिजली की लागत को कम करना
- सिंचाई खर्चों को घटाना
- ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना
- किसानों की आमदनी में इजाफ़ा करना
✔ PM-KUSUM 2.0 पुरानी योजना का अगला और नया विस्तार है, जिसमें निवेश, तकनीकी सुधार, और Grid-Integration पर ज़ोर दिया गया है।
📊 2. PM-KUSUM 2.0 के लिए वित्तीय आवंटन और बजट हाइक
➡ 45% फंडिंग बढ़ोतरी: सरकार ने PM-KUSUM की कुल funding को लगभग ₹50,000 करोड़ तक बढ़ाया है, जो पहले की लगभग ₹34,422 करोड़ से भारी वृद्धि है।
➡ 2026-27 के लिए तुरंत आवंटन:
बजट में इस योजना के लिए लगभग ₹5,000 करोड़ की राशि तुरंत जारी की गयी है, जो पहले के करीब ₹2,600 करोड़ की बजाय दोगुनी है।
✔ इसका सीधा अर्थ:
- किसानों को ज़्यादा सब्सिडी और लाभ मिलेगा
- सोलर प्रोजेक्ट्स को जल्दी लागू किया जायेगा
- नई तकनीकों को प्रोत्साहन मिलेगा
📌 3. PM-KUSUM 2.0 में रणनीतिक बदलाव
PM-KUSUM 2.0 पुराने मॉडल से कुछ बड़े बदलाव लेकर आया है, जिससे किसान तथा ग्रामीण ऊर्जा सेक्टर को और अधिक स्थिर लाभ मिल सके:
🔹 A. Decentralized Grid-Connected Solar Plants (Component A)
• किसान, FPO (Farmer Producer Organisations), cooperatives और पंचायतों को 500 kW से 2 MW तक के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का मौका मिलेगा।
• ये सोलर प्लांट्स ग्रिड से जुड़े होंगे और उत्पादन की अतिरिक्त ऊर्जा स्थानीय DISCOMs को बेच दी जाएगी।
👉 मतलब: किसान अब सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि Urjadatas (ऊर्जा उत्पादक) भी बनेंगे।
🔹 B. Feeder-Level Solarization (ग्रामीण feeder स्तर पर सोलर)
• पहले सिर्फ individual pumps सोलर किए जाते थे, लेकिन अब पूरा feeder सोलराइज करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।
• इससे न सिर्फ एक-एक किसान को बल्कि पूरे क्षेत्र को दिन में बेहतर बिजली मिलेगी।
📌 लाभ:
✔ बिजली सप्लाई में reliability बढ़ेगी
✔ फ़ीडर-लेवल पर daytime power beschikbaar होगी
🔹 C. बैटरी एनर्जी स्टोरेज (Battery Energy Storage)
PM-KUSUM 2.0 में पहली बार Battery Energy Storage Systems (BESS) को शामिल किया जा रहा है ताकि सोलर पावर का intermittency issue (अस्थिरता) कम हो सके और rural grid को stabilize किया जा सके।
👉 इससे दिन में बनायी ऊर्जा को देर तक उपयोग में लाया जा सकेगा और रात में भी फायदा मिलेगा।
🔹 D. Agrivoltaics (Agro-PV) – खेती और सोलर को एक साथ
• सोलर पैनल्स को stilt-mounted (ऊँचा लगाया गया) किया जायेगा ताकि नीचे खेती जारी रहे।
• इससे जमीन का dual use (दोहरी उपयोग) सुनिश्चित होगा – जहाँ खेती होती है वहीँ ऊर्जा उत्पादन भी होता है।
🏭 4. PM-KUSUM 2.0 के मुख्य Components
PM-KUSUM योजना तीन मूल Components पर आधारित है (जो कि 2.0 के साथ आगे सुधार के साथ जारी हैं):
✳ Component A – Decentralized Renewable Power Plants
• किसान और अन्य संस्थाएँ 500 kW से 2 MW तक के सोलर प्लांट लगा सकते हैं।
• ग्रिड से जुड़कर बिजली बेच सकते हैं।
✳ Component B – Standalone Solar Pumps (Off-Grid)
• ऑफ-ग्रिड इलाकों में standalone solar pumps लगाए जाएंगे।
• पुराने डीज़ल पंपों को solar pumps से बदला जायेगा।
📌 इससे किसानों को सिंचाई के लिए बिजली का ख़र्च काफी कम होगा।
✳ Component C – Solarisation of Grid-Connected Pumps
• पहले से grid से जुड़े कृषि पंपों को solar वाली बिजली से connect किया जायेगा।
• इसके साथ ही feeder-level solarisation भी किया जायेगा।
👉 मतलब, अब individual level से ऊपर उठकर पूरा क्षेत्र बड़े स्तर पर सौर समाधान से जुड़ेगा।
🤝 5. किसानों के लिए फायदे – Income से Energy तक
💸 A. आय (Income) में वृद्धि
• किसान अपना surplus energy बेचकर अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं।
• Component A के अंतर्गत किसान सालाना lakhों रुपये तक की earning कर सकते हैं।
🛢 B. डीज़ल खर्च में बचत
• सोलर पंप से डीज़ल की आवश्यकता ख़त्म हो जाएगी और हर साल लाखों रुपए बचेंगे।
⚡ C. reliable daytime power (दिन के समय बेहतर बिजली)
Feeder-level solarisation से खेतों में दिन में निरंतर बिजली उपलब्ध होगी और किसानों को कटौती का सामना कम करना पड़ेगा।
🌱 D. पर्यावरण-मित्रता (Environmental Benefits)
• सोलर ऊर्जा का उपयोग होने से CO₂ emission घटेगा।
• पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी और साफ़ ऊर्जा बढ़ेगी।
🛠 6. PM-KUSUM 2.0 के लिए जरूरी सुधार और चुनौती
✔ सरकार compliance को आसान बनाने, private investment लाने और project की implementation को तेज़ करने की दिशा में भी कदम उठा रही है।
✔ कुछ राज्यों ने ग्रिड इंटीग्रेशन में technical challenges देखे हैं जैसे overvoltage और inverter issues, जिसकी वजह से distribution system में reforms की ज़रूरत पर बल दिया जा रहा है।
📅 7. Timeline और विस्तार
• योजना का मूल चरण (PM-KUSUM Phase-1) मार्च 2026 को समाप्त होने वाला था लेकिन इसे extension दे दिया गया है ताकि 2.0 smoothly लागू हो सके और प्रोजेक्ट pipeline पर continuity बनी रहे।
🌍 8. भारत में PM-KUSUM का व्यापक प्रभाव (States में प्रगति)
📍 राजस्थान ने PM-KUSUM के तहत 3,000 MW से अधिक capacity हासिल की है और मजदूरों तथा किसानों को daytime power उपलब्ध कराने में सफलता पाई है।
💡 लुमिनस पावर टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियों ने राजस्थान में 350 MW Solar Orders हासिल किये हैं, जिससे ऊर्जा उत्पादन और रोजगार दोनों को boost मिला है।
✅ 9. निष्कर्ष – क्यों है PM-KUSUM 2.0 महत्वपूर्ण?
PM-KUSUM 2.0 सिर्फ एक योजना नहीं है, बल्कि यह भारत के ग्रामीण ऊर्जा परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव है:
✔ किसानों को ऊर्जा producer बनाया जा रहा है
✔ ऊर्जा आत्म-निर्भरता बढ़ाई जा रही है
✔ खर्च घटेंगे और आमदनी बढ़ेगी
✔ साफ़ ऊर्जा को अपनाने में मदद मिलेगी
✔ ग्रामीण क्षेत्रों में livelihood और economy दोनों मजबूत होंगे





