भारतीय रेलवे (Indian Railways) विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जिसे भारत की आर्थिक और सामाजिक जीवनरेखा माना जाता है। प्रतिदिन करोड़ों यात्री एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा के लिए ट्रेनों का सहारा लेते हैं। लंबी दूरी और रात के सफर के दौरान यात्रियों की पहली पसंद एयर-कंडीशंड कोच (AC Coaches) होते हैं, जिनमें फर्स्ट एसी (1AC), सेकंड एसी (2AC), थर्ड एसी (3AC) और हाल ही में शुरू की गई एसी इकोनॉमी (3E) श्रेणी शामिल है। इन सभी वातानुकूलित श्रेणियों में सफर करने वाले यात्रियों को रेलवे की ओर से एक सीलबंद ‘बेडरोल किट’ (Bedroll Kit) दिया जाता है, जिसका शुल्क टिकट के कुल किराये में ही पहले से शामिल होता है।
इस पैक्ड किट के भीतर दो सफेद चादरें (Two White Bedsheets), एक भारी ऊनी कंबल (Woollen Blanket), एक तकिया और उसका कवर (Pillow and Pillow Cover), तथा एक छोटा तौलिया (Hand/Face Towel) उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, सालों से एसी कोच में सफर करने वाले अधिकांश यात्रियों के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि जब ओढ़ने के लिए कंबल दिया ही गया है, तो फिर दो-दो चादरें देने का क्या औचित्य है? जानकारी के अभाव में अधिकतर रेल यात्री दोनों चादरों को सीट पर ही बिछा देते हैं या एक चादर बिछाकर सीधे कंबल ओढ़ लेते हैं।
हाल ही में संसद के उच्च सदन (Rajya Sabha) में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा दिए गए एक लिखित उत्तर ने एसी कोच में मिलने वाली इन दो चादरों के पीछे के स्वास्थ्य, वैज्ञानिक और स्वच्छता से जुड़े कारणों को स्पष्ट किया है।
एसी कोच में दो चादरें दिए जाने का मुख्य कारण: सैनिटरी बैरियर और हाइजीन प्रोटोकॉल
ट्रेन के एसी कोच में दो चादरें दिए जाने का प्राथमिक कारण यात्रियों की व्यक्तिगत स्वच्छता (Personal Hygiene) और स्वास्थ्य सुरक्षा (Health Safety) से जुड़ा हुआ है। भारतीय रेलवे के लिनन प्रबंधन (Linen Management Protocol) में विभिन्न कपड़ों की धुलाई का एक सख्त नियम निर्धारित है।
धुलाई की समयावधि का अंतर (Washing Frequency Discrepancy)
भारतीय रेलवे में चादरों और कंबलों की धुलाई की समय-सीमा में बड़ा अंतर होता है:
- सफेद चादरें, तकिया कवर और तौलिए: इन सभी सूती कपड़ों को प्रत्येक यात्रा (Single Use) के बाद मशीनीकृत लॉन्ड्री (Mechanised Laundry) में उच्च तापमान पर धोया जाता है। एक बार किसी यात्री द्वारा उपयोग किए जाने के बाद इन्हें बिना धोए दूसरे यात्री को नहीं दिया जाता।
- ऊनी कंबल (Woollen Blanket): भारी ऊनी कपड़े के बने होने के कारण कंबलों को हर यात्रा के बाद धोना व्यावहारिक और तकनीकी रूप से संभव नहीं होता। रेलवे नियमों के अनुसार, ऊनी कंबलों को महीने में कम से कम एक या दो बार ही धोया जाता है।

सैनिटरी लेयर का सिद्धांत (Sanitary Barrier Layer Principle)
संसद में राज्यसभा सांसद चंद्रकांत दामोदर हंडोरे द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि चूंकि ऊनी कंबल महीने में एक बार धोए जाते हैं, इसलिए वे सैकड़ों यात्रियों के संपर्क में आते हैं। ऐसी स्थिति में यात्रियों को जीवाणु (Bacteria), पसीने, मृत त्वचा कोशिकाओं और त्वचा संक्रमण से बचाने के लिए बेडरोल किट में दूसरी चादर शामिल की जाती है।
यह दूसरी चादर यात्री के शरीर और ऊनी कंबल के बीच एक सुरक्षात्मक परत (Protective Shield) का काम करती है। जब यात्री दूसरी चादर को अपने ऊपर ओढ़कर उसके ऊपर से कंबल डालता है, तो भारी ऊनी कंबल का सीधा संपर्क यात्री के शरीर या कपड़ों से नहीं होता। यात्रा समाप्त होने पर उस दूसरी चादर को धो दिया जाता है, जिससे स्वच्छता का चक्र बना रहता है।
थर्मल इंसुलेशन और माइक्रोक्लाइमेट नियंत्रण का वैज्ञानिक गणित
दो चादरों के प्रावधान के पीछे केवल स्वच्छता ही एकमात्र कारण नहीं है, बल्कि इसके पीछे इंसुलेशन (Thermal Insulation) का वैज्ञानिक सिद्धांत भी कार्य करता है।
ट्रेन के एसी कोच में रात के समय केंद्रीय वातानुकूलन प्रणाली (Centralized Air Conditioning) के माध्यम से तापमान को आमतौर पर 19°C से 21°C के आसपास बनाए रखा जाता है। ट्रेन की गति के कारण बर्थ के आसपास लगातार ठंडी हवा का प्रवाह होता रहता है।
- एयर पॉकेट का निर्माण (Creation of Air Pocket): जब कोई यात्री अपने शरीर पर पतली सूती चादर ओढ़ता है और उसके ऊपर से ऊनी कंबल डालता है, तो चादर और कंबल के बीच हवा की एक सूक्ष्म परत (Air Layer) फंस जाती है। सूती कपड़ा पसीने को सोखता है और सांस लेने योग्य (Breathable) होता है, जबकि ऊपर मौजूद ऊनी कंबल बाहर की ठंडी हवा को रोककर रखता है।
- तापमान संतुलन: यह संयोजन शरीर के प्राकृतिक तापमान को बनाए रखता है, जिससे यात्री को न तो अत्यधिक गर्मी महसूस होती है और न ही एसी की ठंडी हवा से ठंड लगती है। इसके विपरीत, यदि कोई यात्री केवल चादर ओढ़ता है तो उसे ठंड लग सकती है, और यदि वह सीधे भारी कंबल ओढ़ता है तो उसे पसीना और त्वचा में खुजली (Skin Irritation) हो सकती है।
क्या आप दो चादरों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं? जानिए सही तरीका
भारतीय ट्रेनों में यात्रा करने वाले अधिकांश यात्री अनजाने में बेडरोल किट का गलत तरीके से उपयोग करते हैं, जिससे इस पूरी प्रणाली का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।
यात्रियों द्वारा की जाने वाली आम गलतियाँ
- गलती 1: दोनों चादरों को बर्थ पर बिछाना: अधिकांश यात्री बर्थ (Leather Sleeper Seat) को अधिक साफ या गद्देदार बनाने के लिए दोनों सफेद चादरों को एक के ऊपर एक सीट पर ही बिछा देते हैं। इसके बाद वे सीधे ऊनी कंबल को अपने ऊपर ओढ़ लेते हैं, जिससे कंबल सीधे उनकी गर्दन और चेहरे के संपर्क में आता है।
- गलती 2: केवल एक चादर का उपयोग करना: कई यात्री एक चादर को सीट पर बिछाते हैं और दूसरी चादर को मोड़कर कोने में रख देते हैं तथा केवल कंबल ओढ़कर सो जाते हैं।
- गलती 3: तकिए पर चादर लपेटना: कुछ यात्री अतिरिक्त चादर का उपयोग तकिए को ढकने के लिए करते हैं, जबकि किट में तकिए के लिए अलग से ‘पिलो कवर’ (Pillow Cover) दिया होता है।
रेलवे द्वारा निर्धारित उपयोग का सही तरीका (Correct Step-by-Step Method)
- प्रथम चरण (Step 1): पैक्ड किट से पहली सफेद चादर निकालें और उसे अपनी बर्थ (Sleeper Seat) पर पूरी तरह बिछाएं। यह चादर आपको सीट पर जमी गंदगी या रेक्सीन के सीधे संपर्क से बचाती है।
- द्वितीय चरण (Step 2): तकिए पर दिए गए Pillow Cover को चढ़ाएं और उसे सीट के सिरहाने रखें।
- तृतीय चरण (Step 3): लेटने के बाद दूसरी सफेद चादर को अपने शरीर पर पूरी तरह ओढ़ लें।
- चतुर्थ चरण (Step 4): अब दूसरी चादर के ऊपर से ऊनी कंबल (Woollen Blanket) को ओढ़ें। यह ध्यान रखें कि कंबल का कोई भी हिस्सा आपकी त्वचा को सीधे न छुए।

| उपयोग का पहलू | गलत तरीका (Incorrect Practice) | सही तरीका (Correct Practice) |
|---|---|---|
| सीट/बर्थ (Seat Layer) | दोनों चादरों को सीट पर बिछाना | केवल पहली चादर को सीट पर बिछाना |
| शरीर के संपर्क में (Body Contact) | सीधे ऊनी कंबल को ओढ़ना | दूसरी सफेद चादर को शरीर पर ओढ़ना |
| ऊपरी आवरण (Top Layer) | चादर को कंबल के ऊपर रखना | दूसरी चादर के ठीक ऊपर से ऊनी कंबल डालना |
| स्वास्थ्य प्रभाव | त्वचा संक्रमण व अस्वच्छता का जोखिम | 100% हाइजीनिक, पसीने व बैक्टीरिया से बचाव |
भारतीय रेलवे की आधुनिक लॉन्ड्री प्रणाली: AI Cameras और Whito-Meters की भूमिका
लाखों यात्रियों के लिए प्रतिदिन साफ-सुथरे बेडरोल तैयार करना भारतीय रेलवे के लिए एक विशाल लॉजिस्टिक चुनौती है। यात्रियों को बेदाग और स्वच्छ लिनन (Clean Linen) प्रदान करने के लिए रेलवे ने आधुनिक तकनीकों और ऑटोमेशन का सहारा लिया है।
1. अत्याधुनिक मशीनीकृत लॉन्ड्री (Mechanised & BOOT Laundries)
भारतीय रेलवे ने देश भर के प्रमुख रेल मंडलों में बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOOT) और मेकनाइज्ड लॉन्ड्री स्थापित की हैं। इन लॉन्ड्री में कपड़ों की धुलाई, सुखाने और इस्त्री (Ironing) का काम स्वचालित मशीनों द्वारा किया जाता है। धुलाई के दौरान उच्च तापमान वाले पानी और इको-फ्रेंडली रसायनों का उपयोग किया जाता है ताकि कीटाणु पूरी तरह नष्ट हो जाएं।
2. ऑटोमेटेड AI-कैमरा स्टेन डिटेक्शन तकनीक (AI Stain Detection)
धुलाई की गुणवत्ता में मानव त्रुटि (Human Error) को समाप्त करने के लिए रेलवे ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग शुरू किया है।
- पायलट प्रोजेक्ट: सेंट्रल रेलवे के पुणे डिवीजन (Pune Division) तथा उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर और जोधपुर डिवीजन (Jaipur & Jodhpur Divisions) में AI-Camera Based Stain Detection Technology का सफल परीक्षण किया जा रहा है।
- कार्यप्रणाली: धुलाई के बाद जब चादरें कन्वेयर बेल्ट से गुजरती हैं, तो हाई-स्पीड एआई कैमरे प्रति सेकंड दर्जनों तस्वीरें लेते हैं। यदि किसी चादर पर कोई सूक्ष्म दाग या धब्बा रह जाता है, तो एआई सिस्टम तुरंत उस चादर को चिन्हित करके रिजेक्ट कर देता है, ताकि वह यात्री तक न पहुंचे।
3. व्हाइटो-मीटर (Whito-Meters) द्वारा सफाई का मूल्यांकन
लॉन्ड्री में धुली हुई चादरों की सफेदी और चमक के सटीक स्तर को जांचने के लिए रेलवे ‘व्हाइटो-मीटर’ (Whito-Meters) तकनीक का उपयोग करता है। यह एक वैज्ञानिक उपकरण है जो कपड़े पर प्रकाश के परावर्तन (Light Reflection) को मापकर यह बताता है कि कपड़ा निर्धारित मापदंडों के अनुसार साफ हुआ है या नहीं।
4. सीसीटीवी निगरानी (CCTV Monitoring)
देश भर की सभी मशीनीकृत लॉन्ड्री में धुलाई और पैकिंग की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि धुलाई के बाद कपड़ों को बिना किसी मानवीय अस्वच्छता के सीधे सीलबंद पैकेट में पैक किया जाए।

सफेद रंग की चादरों का ही चयन क्यों?
रेलवे द्वारा केवल सफेद रंग के लिनन का उपयोग किए जाने के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं:
- दाग की तुरंत पहचान: सफेद कपड़े पर गंदगी, धूल या दाग आसानी से दिखाई दे जाते हैं, जिससे गंदे कपड़ों को छांटना आसान होता है।
- कठोर सैनिटाइजेशन: सफेद कपड़ों को ब्लीच और 80°C से अधिक तापमान वाले गर्म पानी में बिना रंग उड़ने के डर से धोया जा सकता है।
- स्वच्छता का अहसास: सफेद रंग मनोवैज्ञानिक रूप से यात्री में स्वच्छता और सुरक्षा का विश्वास जगाता है।
रेलवे लिनन के नियम: ‘कोडल लाइफ’ (Codal Life) और रिप्लेसमेंट पॉलिसी
रेलवे बोर्ड द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार, बेडरोल किट के प्रत्येक सामान की एक निश्चित सेवा अवधि (Lifespan) होती है, जिसे रेलवे की वित्तीय भाषा में Codal Life कहा जाता है। यदि कोई कपड़ा इस निर्धारित अवधि से पहले भी घिस जाता है या उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है, तो उसे तुरंत सेवाओं से हटाकर नष्ट या नीलाम कर दिया जाता है।
रेलवे नियमों के तहत बेडरोल किट के विभिन्न सामानों की कोडल लाइफ का विवरण इस प्रकार है:
| क्रम संख्या | लिनन आइटम (Linen Item) | निर्धारित कोडल लाइफ (Service Life) |
|---|---|---|
| 1 | हथकरघा चादर (Handloom Bed Sheet) | 12 महीने (1 वर्ष) |
| 2 | पॉलीवास्ट्रा चादर (Polyvastra Bed Sheet – KVIC) | 24 महीने (2 वर्ष) |
| 3 | तकिया कवर (Pillow Cover) | 9 महीने |
| 4 | तौलिया (Face / Hand Towel) | 9 महीने |
| 5 | तकिया (Pillow Insert) | 24 महीने (2 वर्ष) |
| 6 | ऊनी कंबल (Woollen Blanket) | 24 महीने (2 वर्ष) |
समय-समय पर रेल प्रशासन इन सामग्रियों के उपयोग और स्थिति की समीक्षा करता है ताकि यात्रियों को फटे या पुराने कपड़े न मिलें।
भविष्य का बदलाव: Vande Bharat Sleeper और Blanket Covers की नई पहल
दो अलग-अलग चादरों के इस्तेमाल में यात्रियों को होने वाली असुविधा और भ्रम को दूर करने के लिए भारतीय रेलवे एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव कर रहा है।
कंबलों के लिए ‘ब्लैंकेट कवर’ (Blanket Covers / Duvet Covers)
रेल मंत्रालय ने यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कंबलों पर कवर चढ़ाने का एक पायलट प्रोजेक्ट (Pilot Project) शुरू किया है।
- वर्तमान स्थिति: उत्तर पश्चिम रेलवे (North Western Railway) द्वारा संचालित ट्रेनों और हाल ही में कामाख्या और हावड़ा के बीच शुरू की गई कामाख्या-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस (Kamakhya-Howrah Vande Bharat Sleeper Express) में सभी एसी यात्रियों को ‘कंबल कवर’ (Blanket Cover) दिए जा रहे हैं।
- कार्यप्रणाली: इस व्यवस्था में ऊनी कंबल को पहले से ही एक जिप वाले या बटन वाले धोने योग्य सफेद सूती आवरण (Cover) के अंदर पैक कर दिया जाता है।
- फायदा: इससे यात्रियों को शरीर पर अलग से दूसरी चादर ओढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती। ट्रेन की यात्रा समाप्त होने पर उस कंबल कवर को निकाल कर चादरों की तरह ही हर ट्रिप के बाद धोया जाता है। यात्रियों की ओर से इस पहल की काफी सराहना की गई है और भविष्य में इसे सभी प्रीमियम और मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में लागू करने की योजना है।
गंदा या फटा हुआ बेडरोल मिलने पर क्या करें? (RailMadad Complaint Guide)
यदि यात्रा के दौरान आपको सील टूटा हुआ, गंदा, बदबूदार या फटा हुआ बेडरोल प्राप्त होता है, तो आपको चुपचाप सहन करने की आवश्यकता नहीं है। भारतीय रेलवे का एकीकृत शिकायत निवारण पोर्टल RailMadad (139) ऐसी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए चौबीसों घंटे काम करता है।
शिकायत दर्ज करने के 3 आसान तरीके
1. RailMadad Mobile App / Web Portal के माध्यम से
- अपने स्मार्टफोन में RailMadad App खोलें या आधिकारिक वेबसाइट
railmadad.indianrailways.gov.inपर जाएं। - अपने मोबाइल नंबर या ईमेल से OTP के जरिए लॉगिन करें।
- Train Complaint विकल्प पर क्लिक करें और अपना 10 अंकों का PNR Number दर्ज करें।
- घटना की श्रेणी में Bedroll / Cleanliness को चुनें।
- गंदे बेडरोल या चादर की एक स्पष्ट फोटो खींचकर अपलोड करें और अपनी शिकायत सबमिट करें।
2. SMS के माध्यम से (SMS Complaint Facility)
- यदि आपके पास स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा नहीं है, तो अपने साधारण मोबाइल से एक SMS टाइप करें:
MADAD <स्थान/PNR नंबर/शिकायत का विवरण> - इस संदेश को 139 पर या 9717630982 पर भेज दें।
3. 139 IVRS Call के माध्यम से
- अपने फोन से 139 डायल करें।
- अपनी भाषा चुनें (हिन्दी के लिए उपयुक्त विकल्प चुनें)।
- सामान्य शिकायतों के लिए 4 दबाएं।
- सीधे कॉल सेंटर एग्जीक्यूटिव से बात करने के लिए * (Asterisk) दबाएं।
शिकायत के बाद की प्रक्रिया (Redressal Mechanism)
शिकायत दर्ज होते ही आपको एक यूनिक Complaint Reference Number (CRN) प्राप्त होता है। यह शिकायत सीधे रनिंग ट्रेन के ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) और संबंधित डिवीजन के कोचिंग डिपो अधिकारी तक पहुंचती है। 15 से 30 मिनट के भीतर कोच अटेंडेंट आपकी बर्थ पर आकर पुराना बेडरोल बदलकर नया और साफ बेडरोल पैकेट प्रदान करता है।
गरीब रथ (Garib Rath) और विभिन्न एसी श्रेणियों में बेडरोल के नियम
विभिन्न प्रकार की ट्रेनों और एसी श्रेणियों में बेडरोल के नियम अलग-अलग होते हैं, जिन्हें समझना यात्रियों के लिए आवश्यक है:
1. 1AC, 2AC, 3AC और AC Economy (3E)
इन सभी मानक वातानुकूलित श्रेणियों में बेडरोल किट का शुल्क यात्री के रेल टिकट किराये (Ticket Fare) में ही स्वतः शामिल होता है। यदि किसी कारणवश टीटीई या कोच अटेंडेंट आपको बेडरोल देने से मना करता है, तो आप इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान न करें और सीधे 139 पर शिकायत दर्ज कराएं।
2. Garib Rath Express (गरीब रथ)
गरीब रथ ट्रेनों का निर्माण कम किराये में एसी सफर की सुविधा देने के लिए किया गया था।
- शुल्क का नियम: गरीब रथ एक्सप्रेस के थर्ड एसी (3E) कोच में बेडरोल किट टिकट किराये में अनिवार्य रूप से शामिल नहीं होता है।
- विकल्प: टिकट बुक करते समय IRCTC वेबसाइट/ऐप पर ₹25 का अतिरिक्त बेडरोल शुल्क चुनने का विकल्प मिलता है। यदि आपने बुकिंग के समय यह विकल्प नहीं चुना है, तो आप ट्रेन के अंदर कोच अटेंडेंट को ₹25 का नकद भुगतान करके रसीद प्राप्त कर बेडरोल किट ले सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
- क्या एसी कोच में मिलने वाला ऊनी कंबल हर यात्रा के बाद धोया जाता है?
नहीं, ऊनी कंबलों को हर यात्रा के बाद नहीं धोया जाता। रेलवे नियमों के अनुसार कंबलों की धुलाई महीने में कम से कम एक या दो बार की जाती है। इसी कारण से शरीर और कंबल के बीच दूसरी चादर का उपयोग सैनिटरी बैरियर के रूप में करने की सलाह दी जाती है।
- क्या यात्री घर जाते समय बेडरोल का तौलिया या चादर अपने साथ ले जा सकते हैं?
नहीं, रेलवे द्वारा प्रदान किया जाने वाला बेडरोल किट (चादरें, तकिया, तौलिया और कंबल) रेलवे की संपत्ति है। इसे यात्रा समाप्त होने पर बर्थ पर ही छोड़ना अनिवार्य है। लिनेन की चोरी करना एक दंडनीय अपराध है जिसके लिए रेल अधिनियम के तहत जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है।
- यदि पैक्ड बेडरोल की सील टूटी हुई मिले तो क्या करें?
यदि आपको मिलने वाले बेडरोल पैकेट की सील पहले से टूटी हुई है, तो उसे स्वीकार न करें। तुरंत कोच अटेंडेंट से पूरी तरह सीलबंद (Sealed) पैकेट की मांग करें। यदि अटेंडेंट मना करे तो RailMadad 139 पर शिकायत दर्ज करें।
- क्या दिन के सफर (Chair Car / CC) में भी बेडरोल मिलता है?
जनशताब्दी, शताब्दी या वंदे भारत चेयर कार जैसी दिन की ट्रेनों में बेडरोल किट प्रदान नहीं किया जाता है। बेडरोल केवल ओवरनाइट (रात की) ट्रेनों के एसी कोचों (1AC, 2AC, 3AC, 3E) में ही उपलब्ध कराया जाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
भारतीय रेलवे के एसी कोच में दो चादरें दिए जाने का निर्णय केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि यात्री स्वास्थ्य, सैनिटेशन और थर्मल कम्फर्ट से जुड़ा एक सुविचारित वैज्ञानिक कदम है। धुलाई चक्र की भिन्नता के कारण भारी ऊनी कंबलों को सीधे शरीर से स्पर्श होने से बचाने के लिए दूसरी चादर एक अनिवार्य हाइजीन लेयर का काम करती है।
एक जिम्मेदार रेल यात्री होने के नाते, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का सही उपयोग करें। अगली बार जब भी आप ट्रेन के एसी कोच में यात्रा करें, तो पहली चादर बर्थ पर बिछाएं, दूसरी चादर अपने ऊपर ओढ़ें और उसके ऊपर से कंबल डालकर आरामदायक एवं सुरक्षित यात्रा का आनंद लें। सफर के दौरान अस्वच्छता या खराब सेवा की स्थिति में रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 और RailMadad ऐप का उपयोग करके अपनी नागरिक जिम्मेदारी निभाएं।








