
भारत त्यौहारों का देश है, लेकिन जब बात Braj Ki Holi (ब्रज की होली) की आती है, तो पूरी दुनिया की नजरें मथुरा, वृंदावन और विशेष रूप से बरसाना पर टिक जाती हैं। बरसाना की Lathmar Holi केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और परंपरा का एक ऐसा सैलाब है, जिसे देखने के लिए सात समंदर पार से लोग आते हैं।
वर्ष 2026 में लठमार होली कब है? इसका क्या महत्व है? और राधा की नगरी में यह परंपरा कैसे निभाई जाती है? आइए, इस विस्तृत लेख (Detailed Article) में जानते हैं।
1. लठमार होली 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त (Lathmar Holi 2026 Date & Timings)
- Lathmar Holi in Barsana: 25 फरवरी, 2026 (संभावित तिथि, फाल्गुन शुक्ल नवमी)
- Lathmar Holi in Nandgaon: 26 फरवरी, 2026 (फाल्गुन शुक्ल दशमी)
ब्रज के कैलेंडर के अनुसार, होली का उत्सव महाशिवरात्रि के बाद से ही शुरू हो जाता है, लेकिन मुख्य आकर्षण Barsana Holi से ही शुरू होता है।
| तिथि और दिन (Date & Day) | उत्सव का नाम (Event) | स्थान (Place) |
| 23 Jan 2026 (शुक्रवार) | बसंत पंचमी – रंगोत्सव का प्रारंभ | ब्रज के सभी प्रमुख मंदिर |
| 24 Feb 2026 (मंगलवार) | फाग आमंत्रण एवं लड्डू होली | नंदगाँव और बरसाना |
| 25 Feb 2026 (बुधवार) | लठमार होली | बरसाना |
| 26 Feb 2026 (गुरुवार) | लठमार होली | नंदगाँव |
| 27 Feb 2026 (शुक्रवार) | रंगभरनी एकादशी / फूलों की होली | वृंदावन |
| 01 Mar 2026 (रविवार) | छड़ी मार होली | गोकुल |
| 02 Mar 2026 (सोमवार) | रमण रेती होली / विधवा होली | गोकुल और वृंदावन |
| 03 Mar 2026 (मंगलवार) | होलिका दहन | मथुरा और अन्य मंदिर |
| 04 Mar 2026 (बुधवार) | धुलेंडी / रंगवाली होली (मुख्य होली) | मथुरा, वृंदावन और संपूर्ण ब्रज |
| 05 Mar 2026 (गुरुवार) | दाऊजी का हुरंगा | दाऊजी मंदिर, मथुरा |
2. बरसाना: श्री राधा रानी की पावन नगरी (Barsana: The City of Radha Rani)
बरसाना, जो उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित है, भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति Shri Radha Rani का जन्मस्थान माना जाता है। यहाँ का कण-कण राधा-कृष्ण के प्रेम की कहानियाँ सुनाता है। बरसाना की पहाड़ियों पर स्थित Radha Rani Temple (लाड़ली जी मंदिर) इस उत्सव का मुख्य केंद्र होता है।
Key Highlights of Barsana:
- Bhanugarh Hill: जहाँ मुख्य मंदिर स्थित है।
- Piri Pokhar: जहाँ नंदगाँव के ग्वाल होली खेलने से पहले विश्राम करते हैं।
3. लठमार होली का प्राचीन इतिहास (Ancient History of Lathmar Holi)
लठमार होली की शुरुआत हजारों साल पहले द्वापर युग में हुई थी। पौराणिक कथाओं (Mythological Stories) के अनुसार:
- कृष्ण की शरारत: भगवान कृष्ण अपने सखाओं (ग्वालों) के साथ नंदगाँव से राधा जी के गाँव बरसाना होली खेलने जाते थे।
- राधा और गोपियों का जवाब: जब कृष्ण और उनके मित्र राधा और उनकी सखियों को चिढ़ाते या उन पर रंग डालते, तो गोपियाँ उन्हें प्यार से डराने के लिए लाठियाँ उठा लेती थीं।
- परंपरा का जन्म: यहीं से ‘लठमार’ (Lath – Stick, Mar – Strike) परंपरा की शुरुआत हुई। आज भी नंदगाँव के पुरुष (होरियारे) और बरसाना की महिलाएँ (होरियारिनें) इसी परंपरा को जीवंत करती हैं।
4. लठमार होली कैसे खेली जाती है? (How Lathmar Holi is Celebrated?)
यह उत्सव कोई सामान्य खेल नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी Ritualistic Process (अनुष्ठानिक प्रक्रिया) होती है:
क. समाज गायन (Devotional Singing)
होली खेलने से पहले मंदिरों में ‘समाज’ बैठता है। इसमें ब्रजभाषा में प्राचीन होली गीत गाए जाते हैं, जिन्हें सुनकर मन भक्ति से भर जाता है।
ख. नंदगाँव के होरियारे (The Men of Nandgaon)
नंदगाँव के पुरुष सिर पर पगड़ी बांधकर और ढाल (Shield) लेकर बरसाना पहुँचते हैं। वे खुद को कृष्ण का प्रतीक मानते हैं।
ग. बरसाना की होरियारिनें (The Women of Barsana)
बरसाना की महिलाएँ पारंपरिक लहंगा-चोली पहनकर और घूंघट निकालकर लाठियों से पुरुषों पर वार करती हैं। यह दृश्य अत्यंत ऊर्जावान (Energetic) होता है।
घ. ढाल और बचाव (Defense and Protection)
पुरुष कठोर लकड़ी या चमड़े से बनी ढालें रखते हैं। वे इन ढालों का इस्तेमाल डंडों के वार को रोकने के लिए करते हैं।
5. बरसाना होली 2026 का मुख्य आकर्षण (Main Attractions for Tourists)
यदि आप 2026 में बरसाना जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन मुख्य आकर्षणों (Main Attractions) को न छोड़ें:
- Natural Colors (प्राकृतिक रंग): यहाँ आज भी टेसू के फूलों से बने रंगों और अबीर-गुलाल का प्रयोग किया जाता है।
- Thandai and Bhang: ब्रज की होली में ‘ठंडाई’ का विशेष महत्व है, जिसे अक्सर प्रसाद के रूप में लिया जाता है।
- Folk Dances (लोक नृत्य): सड़कों पर मोर नृत्य और चरकुला नृत्य देखने को मिलता है।
- Radha Rani Temple View: मंदिर की सीढ़ियों से पूरी नगरी का दृश्य अद्भुत दिखता है।
6. लठमार होली के पीछे का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance)
कई लोग इसे केवल मनोरंजन समझते हैं, लेकिन इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक अर्थ (Deep Spiritual Meaning) छिपा है:
- अहंकार का विनाश: लाठी का प्रहार प्रतीकात्मक रूप से पुरुष के अहंकार (Ego) पर प्रहार है।
- प्रेम की विजय: अंत में, यह युद्ध नहीं बल्कि प्रेम का उत्सव है।
- समानता का संदेश: इस खेल में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, सब ‘राधे-राधे’ के रंग में रंगे होते हैं।
7. बरसाना होली 2026 की यात्रा के लिए टिप्स (Travel Tips for Tourists)
एक यात्री (Traveler) के तौर पर आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- Early Arrival: भीड़ से बचने के लिए दोपहर 12 बजे तक बरसाना पहुँच जाएँ, क्योंकि दोपहर बाद सड़कें बंद हो जाती हैं।
- Clothing: पुराने कपड़े पहनें जिन्हें आप बाद में फेंक सकें। साथ ही, अपनी आंखों को रंगों से बचाने के लिए चश्मा (Sunglasses) पहनें।
- Gadget Protection: अपने मोबाइल और कैमरा को वॉटरप्रूफ बैग (Waterproof Covers) में रखें।
- Stay Options: बरसाना में रुकने के सीमित विकल्प हैं, इसलिए आप मथुरा या गोवर्धन में होटल बुक कर सकते हैं।
8. ब्रज की होली के अन्य रूप (Other Forms of Holi in Braj)
बरसाना के अलावा 2026 में आपको ये उत्सव भी देखने चाहिए:
- Phoolon Wali Holi (वृंदावन): बांके बिहारी मंदिर में फूलों की होली।
- Widow Holi (विधवा होली): गोपीनाथ मंदिर में सदियों पुरानी रूढ़ियों को तोड़ती होली।
- Huranga (बलदेव): दाऊजी मंदिर का प्रसिद्ध हुरंगा।
9. सुरक्षा और प्रशासन की व्यवस्था (Security and Administration)
उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस Barsana Holi 2026 के लिए विशेष इंतजाम करती है।
- CCTV Surveillance: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए।
- Drone Monitoring: सुरक्षा व्यवस्था के लिए।
- First Aid Centers: आपातकालीन स्थिति के लिए जगह-जगह चिकित्सा शिविर।
10. निष्कर्ष (Conclusion)
Lathmar Holi 2026 in Barsana केवल एक इवेंट नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत (Cultural Heritage) का हिस्सा है। राधा की नगरी में बरसने वाला यह रंग भक्ति, विश्वास और आनंद का प्रतीक है। यदि आप भारतीय संस्कृति (Indian Culture) को करीब से देखना चाहते हैं, तो 2026 की यह होली आपके लिए जीवन भर का अनुभव (Lifetime Experience) साबित होगी।







