
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO (Indian Space Research Organisation) 2026 के शुरुआत में ही एक अत्यंत महत्वपूर्ण मिशन के साथ फिर से अंतरिक्ष के मैदान में कदम रखने वाला है। यह मिशन इसलिए खास है क्योंकि PSLV, ISRO का विश्व-प्रसिद्ध Launch Vehicle (रॉकेट), PSLV-C61 की विफलता के बाद अपनी उड़ान को फिर से सफल बनाने उतरेगा।
नीचे हम विस्तार से जानेंगे कि यह मिशन क्या है, इसके Payloads (उपग्रह), क्या खास बात है और इससे भारत को क्या लाभ होगा — आसान हिंदी में और मुख्य बिंदुओं के साथ।
1. लॉन्च शेड्यूल – कब और कहाँ?
✔ लॉन्च डेट (Launch Date): 12 जनवरी 2026 (Monday)
✔ समय (Time): सुबह 10:17 बजे IST
✔ स्थान (Location): First Launch Pad, Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota
✔ रॉकेट (Launch Vehicle): PSLV-DL (दो Solid Strap-on Boosters के साथ)
यह ISRO के लिए 2026 का पहला “Orbital Launch” है और PSLV का 64वाँ मिशन माना जा रहा है।
2. PSLV-C62 मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?
🔹 2025 के अंत में PSLV-C61 / EOS-09 मिशन असफल रहा था, क्योंकि रॉकेट का तीसरा चरण (Third Stage) ठीक से काम नहीं कर पाया था।
🔹 इस वजह से PSLV आज तक के सबसे भरोसेमंद रॉकेट की अपनी प्रतिष्ठा को फिर से मजबूत करना चाहता है — और अब PSLV-C62 इसे साबित करने का पहला मौका है।
🔹 यह भारत का 101वां अंतरिक्ष लॉन्च प्रयास भी होगा।
इसलिए यह मिशन “Return to Flight” यानी फिर उड़ान की वापसी की तरह देखा जा रहा है।
3. मुख्य उपग्रह – EOS-N1 (Anvesha)
📌 EOS-N1 क्या है?
✔ यह एक Earth Observation Satellite है, जिसे DRDO (Defence Research and Development Organisation) द्वारा विकसित किया गया है।
✔ इसका मुख्य उद्देश्य है पृथ्वी का अत्याधुनिक अवलोकन (Imagery / Remote Sensing) करना।
📌 EOS-N1 के उपयोग:
🔹 कृषि मॉनिटरिंग – खेतों की स्थिति, फसल स्वास्थ्य इत्यादि जानने के लिए।
🔹 आपदा प्रबंधन – Floods, भूकंप, सूखे जैसी परिस्थितियों का बेहतर अध्ययन।
🔹 Urban Mapping – नगर क्षेत्रों का विस्तृत मानचित्र और परिवर्तन ट्रैकिंग।
🔹 स्ट्रैटेजिक उपयोग – उच्च-गुणवत्ता वाली इमेजिंग के कारण Border और Sensitive क्षेत्रों की निगरानी में योगदान।
4. Co-Passenger (साथ में उड़ने वाले) Payloads – 18 Plus
PSLV-C62 मिशन में कुल 18 से अधिक अतिरिक्त सैटेलाइट्स भी लॉन्च होंगे — जिसमें भारत और विदेश दोनों के उपग्रह शामिल हैं।
🚀 कुछ प्रमुख Payloads:
🔹 AayulSAT
✔ यह India की पहली On-Orbit Refueling Mission है — यानी अंतरिक्ष में रिफ्यूलिंग टेक्नोलॉजी का परीक्षण।
✔ इसे OrbitAID Aerospace (Bengaluru) ने बनाया है।
✔ इसका उद्देश्य संकेतों, शक्ति, और Propellant को अंतरिक्ष में ही एक सैटेलाइट से दूसरे सैटेलाइट में ट्रांसफर करना है।
🔹 Kestrel Initial Demonstrator (KID)
✔ एक छोटा 25kg re-entry capsule जो Spain की एक Startup द्वारा विकसित किया गया है।
✔ इसका उद्देश्य Affordable Recovery Systems (कम लागत में पुनः प्राप्त तकनीक) को प्रमाणित करना है।
🔹 Indo-Mauritius Joint Satellite (IMJS)
✔ भारत और मॉरीशस के बीच संयुक्त मिशन — Space Cooperation का प्रतीक।
🔹 MOI-1
✔ Hyderabad की Startups द्वारा बनाया गया छोटा Imaging Satellite जिसके अंदर AI (Artificial Intelligence) आधारित Processing क्षमता है।
5. मिशन की रणनीतिक और वैज्ञानिक महत्ता
यह मिशन सिर्फ एक उपग्रह लॉन्च नहीं है — इसके बहुत बड़े महत्व हैं:
🔹 PSLV की विश्वसनीयता को वापस स्थापित करना
PSLV बहुत ठोस इतिहास वाला Launch Vehicle है। PSLV-C62 द्वारा सफलता मिलने से भारत की Launch Capabilities और दृढ़ होंगी।
🔹 व्यापारिक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना
18+ rideshare satellites के साथ, भारत Private Space Companies और International Partners के साथ काम कर रहा है।
🔹 नई तकनीकों का परीक्षण
On-Orbit Refueling, AI-based satellite processing जैसे Next-Gen तकनीकें अब भारत के Space Program में परीक्षण के स्तर पर शामिल हो रही हैं।
6. लॉन्च को कैसे देखें? (Public Viewing)
✔ ISRO ने घोषणा की है कि Launch View Gallery से जनता इस लॉन्च को देख सकती है।
✔ इसके लिए Online Registration आवश्यक है और Valid ID (Aadhaar, Driving License आदि) साथ ले जाना अनिवार्य है।
7. इस साल ISRO का रोडमैप (Roadmap) कितना Busy है?
2026 के पहले हिस्से में ISRO के और भी बड़े मिशन तय हैं, जैसे:
🔹 Gaganyaan-1 (Uncrewed) – March 2026 में Vyommitra के साथ टेस्ट फ्लाइट
🔹 EOS-05 (GISAT-1A) – भारी Imaging Satellite GSLV से
🔹 Space MAITRI Mission – Space Debris Management पर SSLV मिशन
इन मिशनों से भारत के Space Capabilities और Global Positioning में मजबूती आएगी।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
PSLV-C62 / EOS-N1 मिशन ISRO के लिए विश्वास की वापसी, तकनीकी प्रगति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक है।
यह लॉन्च न सिर्फ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की Space रणनीति को और ऊँचा उठाएगा।
📌 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे IST — भारत की आंखें Sriharikota की ओर होंगी जब PSLV फिर से अंतरिक्ष की ओर प्रस्थान करेगा!







