भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) द्वारा शुरू की गई Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया ने देशभर में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए हैं । यह अभियान 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 51 करोड़ मतदाताओं को कवर करता है, जिसमें से लगभग 6.6 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा चुके हैं । इस लेख में हम राज्यवार विस्तार से जानेंगे कि किस प्रदेश में कितने प्रतिशत नाम SIR लिस्ट से हटाए गए हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं।
SIR (Special Intensive Revision) क्या है?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। चुनाव आयोग के अनुसार, जब सामान्य संशोधनों से मतदाता सूची में मौजूद पुरानी गलतियों (Legacy Data Errors) को ठीक नहीं किया जा पाता, तब SIR का सहारा लिया जाता है। भारत में इससे पहले 2002-2003 के दौरान इतना बड़ा गहन पुनरीक्षण किया गया था। लगभग 22-23 साल बाद 2025-2026 में इसे फिर से दोहराया जा रहा है ताकि ‘मृत’, ‘स्थानांतरित’ (Shifted) और ‘डुप्लिकेट’ मतदाताओं को बाहर किया जा सके।
SIR के तहत Booth Level Officers (BLOs) घर-घर जाकर मतदाताओं से enumeration forms भरवाते हैं । जो लोग फॉर्म नहीं भरते या सत्यापन में असफल होते हैं, उनके नाम draft electoral roll से हटा दिए जाते हैं ।
उत्तर प्रदेश: सबसे अधिक प्रतिशत में नाम हटाए गए
उत्तर प्रदेश में SIR के बाद सबसे चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं । राज्य की draft electoral roll में कुल 2.89 करोड़ (28.9 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 18.7 प्रतिशत है । यह प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक deletion percentage है ।
UP में हटाए गए नामों का विवरण इस प्रकार है:
- 2.17 करोड़ (14.06%) – स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके या अनुपस्थित मतदाता
- 46 लाख (2.99%) – मृत मतदाता
- 25.4 लाख (1.65%) – डुप्लिकेट entries
- 7.74 लाख (0.50%) – enumeration forms जमा नहीं करने वाले
लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ और आगरा जैसे शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक नाम हटाए गए हैं ।
अंडमान और निकोबार: सर्वाधिक deletion rate
केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में SIR के तहत सबसे अधिक 21 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं । इसमें 16.72 प्रतिशत मतदाता ट्रांसफर या अनुपस्थित पाए गए, 2.96 प्रतिशत मृत और 0.94 प्रतिशत एक से अधिक जगहों पर पंजीकृत थे ।
यह आंकड़ा सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे अधिक है, जो द्वीपीय क्षेत्र में migration patterns और population mobility को दर्शाता है ।
तमिलनाडु: 15 प्रतिशत नाम डिलीट
तमिलनाडु में SIR draft list में कुल 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो राज्य के total electorate का लगभग 15 प्रतिशत है । यह संख्या की दृष्टि से सबसे अधिक deletions में से एक है ।
तमिलनाडु के आंकड़ों के अनुसार:
- 66.4 लाख – permanently shifted मतदाता
- 26.9 लाख – मृत मतदाता
- बाकी – डुप्लिकेट और अन्य कारण
चेन्नई में सर्वाधिक 14.2 लाख नाम हटाए गए, जो शहर के pre-SIR electorate का 35.6 प्रतिशत था । रामनाथपुरम, चेंगलपट्टू, तिरुपुर और कोयंबटूर में 20-25 प्रतिशत के बीच deletions देखी गईं ।
गुजरात: 14.5 प्रतिशत कटौती
गुजरात में SIR के बाद कुल 73.73 लाख (7.373 मिलियन) मतदाताओं के नाम electoral rolls से हटाए गए, जो कुल का 14.5 प्रतिशत है । राज्य की total electorate 5.08 करोड़ से घटकर 4.35 करोड़ रह गई है ।
गुजरात में deletions का विवरण:
- 51.86 लाख (10.20%) – shifted या absent मतदाता
- 18.07 लाख (3.55%) – मृत मतदाता
- 3.81 लाख (0.75%) – multiple places पर enrolled
- 1.95 lakh – अन्य कारण
सूरत में सबसे अधिक 25.66 प्रतिशत नाम हटाए गए, उसके बाद अहमदाबाद में 23.21 प्रतिशत और वडोदरा में 18.74 प्रतिशत । tribal-dominated जिलों जैसे डांग, नर्मदा और छोटा उदयपुर में 8 प्रतिशत से कम deletions हुईं ।
पश्चिम बंगाल: 7.6 प्रतिशत डिलीशन
पश्चिम बंगाल की draft electoral roll में लगभग 58.11 लाख (5.82 मिलियन) नाम हटाए गए हैं, जो राज्य के 7.66 करोड़ मतदाताओं का करीब 7.6 प्रतिशत है । यह बिहार में देखे गए 8 प्रतिशत deletions के करीब है ।
पश्चिम बंगाल के आंकड़ों में:
- 2.41 मिलियन – मृत मतदाता
- 3.26 मिलियन – shifted या absent
- 138,000 – multiple places पर enrolled
राज्य में 2026 की गर्मियों में चुनाव होने हैं, इसलिए यह SIR process राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है ।
राजस्थान: 41.85 लाख नाम हटाए गए
राजस्थान में SIR के draft list में कुल 41.85 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं । हालांकि exact percentage publicly उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह संख्या significant है क्योंकि राज्य में Panchayat और Civic body elections आने वाले हैं ।
Chief Electoral Officer Naveen Mahajan ने स्पष्ट किया कि करीब 11 लाख मतदाताओं को map नहीं किया जा सका और उन्हें SDM level पर notices भेजे जाएंगे । Draft list को राज्य के सभी 41 जिलों, 199 विधानसभा constituencies और 61,136 polling stations में तैयार किया गया है ।
मध्य प्रदेश: 42.74 लाख deletions
मध्य प्रदेश में SIR draft voter list में 42.74 लाख (4.274 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं । राज्य की current voter count 5.31 करोड़ है, जो पहले 5.74 करोड़ थी ।
MP में deletions का breakdown:
- 31.51 लाख – shifted या absent मतदाता
- मृत मतदाता – significant number
- 2.77 लाख (0.48%) – एक से अधिक जगह enrolled
राज्य में लगभग 8.65 लाख unmapped voters भी पहचाने गए, जिनके data 2003 के records में missing हैं ।
छत्तीसगढ़: 27 लाख से अधिक नाम कटे
छत्तीसगढ़ में SIR प्रक्रिया के बाद 27 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम electoral rolls से हटाए गए हैं । राज्य में कुल 1.84 करोड़ मतदाताओं से enumeration forms एकत्र किए गए थे ।
छत्तीसगढ़ में हटाए गए नामों का विवरण:
- 6.42 लाख – मृत मतदाता
- 19.13 लाख – shift या गायब मतदाता
- 1.79 लाख – duplicate entries
राज्य में लगभग 9 प्रतिशत मतदाताओं के नाम shift या absent होने के कारण हटाए गए ।
केरल: 22-24 लाख नाम हटाए गए
केरल में SIR के बाद 22 से 24 लाख मतदाताओं के नाम draft list से हटाए गए हैं । राज्य के 2.78 करोड़ मतदाताओं में से केवल 5.25 प्रतिशत नाम shift या absent होने के कारण हटाए गए ।
केरल के आंकड़े:
- 2.33 प्रतिशत – मृत मतदाता
- 0.49 प्रतिशत – कई जगह नामांकित
- 1.36 लाख – duplicate entries
- 1.60 लाख – अन्य categories
राज्य में 2.54 करोड़ मतदाताओं से enumeration forms एकत्र किए गए, जो total का 91.35 प्रतिशत है ।
बिहार: 65 लाख से अधिक नाम कटे
बिहार में SIR की शुरुआत सबसे पहले हुई थी । अगस्त 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 65 लाख से अधिक नाम हटाए गए, जो करीब 8 प्रतिशत था । यह प्रतिशत पश्चिम बंगाल के 7.6 प्रतिशत के करीब है ।
गोवा, पुडुचेरी और लक्षद्वीप के आंकड़े
छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी SIR के significant impacts देखे गए:
- गोवा: लगभग 10 लाख नाम हटाए गए
- पुडुचेरी: 1.03 लाख (103,467) नाम हटाए गए, जो 10.1 प्रतिशत deletion rate है
- 20,798 मृत
- 80,645 shifted या absent
- 2,024 multiple places पर enrolled
- लक्षद्वीप: सबसे कम 2.5 प्रतिशत deletions, लगभग 1500 नाम हटाए गए
SIR में नाम हटाने के मुख्य कारण
Electoral rolls से नाम हटाने के पीछे कई कारण हैं जो ECI द्वारा पहचाने गए हैं:
- स्थायी रूप से shift होना: सबसे बड़ा कारण, जब मतदाता दूसरे शहर या राज्य में permanently चले जाते हैं
- मृत मतदाता: जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन नाम सूची में बने रहे
- डुप्लिकेट entries: एक ही व्यक्ति का एक से अधिक जगह पंजीकरण
- लंबे समय से absent: जो लोग अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले
- Enumeration forms जमा नहीं करना: जिन्होंने SIR के दौरान forms नहीं भरे
शहरी क्षेत्रों में migration patterns और population mobility अधिक होने के कारण deletions का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से अधिक है ।
राज्यवार तुलनात्मक विश्लेषण
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | हटाए गए नाम (लाख में) | अनुमानित प्रतिशत | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|---|
| अंडमान और निकोबार | – | 21% | सर्वाधिक deletion rate |
| उत्तर प्रदेश | 289 | 18.7% | प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक |
| तमिलनाडु | 97.37 | 15% | चेन्नई में 35.6% deletions |
| गुजरात | 73.73 | 14.5% | सूरत में 25.66% कटौती |
| पुडुचेरी | 1.03 | 10.1% | छोटे UT में significant |
| बिहार | 65+ | 8% | SIR की शुरुआत यहाँ से |
| पश्चिम बंगाल | 58.11 | 7.6% | आगामी चुनाव के कारण महत्वपूर्ण |
| केरल | 22-24 | 5.25% | सबसे कम deletion percentage |
| लक्षद्वीप | 0.15 | 2.5% | न्यूनतम deletions |
Claims और Objections की प्रक्रिया
ECI ने स्पष्ट किया है कि draft stage में हटाए गए नाम final नहीं हैं । मतदाता claims और objections period के दौरान अपने नाम को फिर से शामिल करवा सकते हैं ।
उत्तर प्रदेश में claims और objections window 6 जनवरी से 6 फरवरी 2026 तक खुली है । इस दौरान eligible voters जिनका नाम draft roll में नहीं है, वे Form-6 submit करके inclusion के लिए apply कर सकते हैं ।
केरल में objections 22 जनवरी तक file किए जा सकते हैं और final rolls 21 फरवरी को publish होंगे । राजस्थान में voters अपने नाम की स्थिति official website पर check कर सकते हैं और आवश्यक documents के साथ claims file कर सकते हैं ।
शहरी बनाम ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर
SIR data से एक clear urban-rural divide दिखाई देता है । शहरी क्षेत्रों में deletions का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से काफी अधिक है:
गुजरात में:
- Urbanized districts: 18-25% deletions
- Tribal-dominated districts (Dang, Narmada): 8% से कम
तमिलनाडु में:
- चेन्नई (urban): 35.6% deletions
- अरियालुर (rural): केवल 4.6% deletions
यह अंतर शहरी क्षेत्रों में higher migration, job transfers, और population mobility के कारण है ।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद
SIR प्रक्रिया राजनीतिक flashpoint बन गई है । कांग्रेस पार्टी ने इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि BJP सरकार और ECI मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर manipulation कर रहे हैं ।
कांग्रेस के senior leader और former Union Minister Bhanwar Jitendra Singh ने आरोप लगाया कि opposition supporters के नाम जानबूझकर political gain के लिए हटाए जा रहे हैं । उन्होंने यह भी दावा किया कि Booth Level Officers पर names delete करने के targets पूरे करने का दबाव है ।
दूसरी ओर, BJP ने कहा है कि SIR के through voter lists को purify किया जा रहा है और केवल Indian citizens को ही voting का अधिकार होगा ।
‘Unmapped’ मतदाता क्या हैं?
SIR 2025-26 प्रक्रिया में ‘Unmapped’ श्रेणी ने काफी हलचल मचाई है। अकेले उत्तर प्रदेश में ही लगभग 1 करोड़ से अधिक मतदाता इस श्रेणी में हैं।
- मतलब: ये वे लोग हैं जिनका नाम वर्तमान सूची में तो है, लेकिन आयोग को उनके पुराने (2003 के) रिकॉर्ड नहीं मिल रहे हैं।
- समाधान: ऐसे मतदाताओं को आयोग द्वारा नोटिस भेजा जा रहा है ताकि वे अपने आधार, जन्म प्रमाण पत्र या निवास प्रमाण पत्र जैसे 12 निर्धारित दस्तावेजों में से कोई एक जमा कर सकें। यदि वे ऐसा नहीं करते, तो उनका नाम अंतिम सूची (Final Roll) से हटा दिया जाएगा।
अपना नाम कैसे चेक करें? (How to Check Your Name in SIR List?)
अगर आपको डर है कि आपका नाम भी कट गया है, तो आप इन स्टेप्स का पालन कर सकते हैं:
- Voters Service Portal: आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं।
- SIR 2026 Section: यहाँ ‘Special Intensive Revision’ का विकल्प चुनें।
- Search by Details: अपना राज्य, जिला और विधानसभा क्षेत्र चुनें। अपना EPIC (Voter ID Number) डालकर सर्च करें।
- ECINET App: आप चुनाव आयोग के मोबाइल ऐप ECINET का उपयोग करके भी अपना स्टेटस देख सकते हैं।
- BLO से संपर्क करें: अपने स्थानीय Booth Level Officer (BLO) के पास जाकर ड्राफ्ट रोल चेक करें।
अगर नाम कट गया है तो क्या करें? (What to do if your name is removed?)
नाम कटने का मतलब यह नहीं है कि आप कभी वोट नहीं दे पाएंगे। चुनाव आयोग ने सुधार के लिए पर्याप्त समय दिया है:
- Form 6 भरें: यदि आपका नाम सूची में नहीं है, तो नए सिरे से पंजीकरण के लिए Form 6 भरें।
- Form 7 (Objections): यदि आपको लगता है कि किसी का नाम गलत तरीके से शामिल है या आपका नाम गलत हटाया गया है, तो आप आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
- दावे और आपत्तियाँ (Claims & Objections): ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद आमतौर पर 30 दिनों का समय दिया जाता है। इस दौरान आप ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
SIR (Special Intensive Revision) 2025-26 भारतीय चुनावी इतिहास की एक बड़ी शुद्धि प्रक्रिया है। उत्तर प्रदेश (18.7%) और तमिलनाडु (15.2%) जैसे राज्यों में नाम हटने का उच्च प्रतिशत यह दर्शाता है कि पिछले दो दशकों में जनसंख्या के आंकड़ों में कितना बड़ा बदलाव आया है।
सब पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे चुनाव आयोग के पोर्टल पर जाकर अपना और अपने परिवार का नाम तुरंत चेक करें। एक जागरूक नागरिक के तौर पर यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि हमारा ‘मतदान का अधिकार’ सुरक्षित रहे।






